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अज़कार

वित्र

वित्र में क़ुनूत, फिर सलाम के बाद के अज़कार।

इल्मी जाँच: अभी बाक़ी है

यह टेक्स्ट सबील की प्रिंट लाइब्रेरी से लिया गया है। इसकी इल्मी जाँच अभी जारी है; जब दो उलमा इस पर दस्तख़त कर देंगे, तब हर चीज़ के साथ उसकी जाँच करने वालों के नाम और तारीख़ दर्ज होगी।

ड्राफ़्ट तर्जुमा: मशीन ने अरबी और अंग्रेज़ी से तैयार किया है, और अभी तक किसी आलिम या मातृभाषी एडिटर ने इसे नहीं पढ़ा है। जहाँ कोई पंक्ति साफ़ न हो, वहाँ अंग्रेज़ी दिखाएँ और अरबी पर भरोसा करें।

जो पंक्तियाँ किसी शरई हुक्म से जुड़ी हैं, उनके नीचे छपी हुई अंग्रेज़ी हमेशा दिखाई जाती है। जिस पंक्ति का ड्राफ़्ट जाँच में खरा नहीं उतरा, वह केवल अंग्रेज़ी में दिखाई जाती है।

दुआ-ए-क़ुनूत (अल-हसन इब्न अली)
1×
اللَّهُمَّ اهْدِنِي فِيمَنْ هَدَيْتَ، وَعَافِنِي فِيمَنْ عَافَيْتَ، وَتَوَلَّنِي فِيمَنْ تَوَلَّيْتَ، وَبَارِكْ لِي فِيمَا أَعْطَيْتَ، وَقِنِي شَرَّ مَا قَضَيْتَ، إِنَّكَ تَقْضِي وَلَا يُقْضَىٰ عَلَيْكَ، وَإِنَّهُ لَا يَذِلُّ مَنْ وَالَيْتَ، تَبَارَكْتَ رَبَّنَا وَتَعَالَيْتَ
अल्लाहुम्म-ह्दिनी फ़ीमन हदैत, व आफ़िनी फ़ीमन आफ़ैत, व तवल्लनी फ़ीमन तवल्लैत, व बारिक ली फ़ीमा अअतैत, व क़िनी शर्र मा क़ज़ैत, इन्नक तक़्ज़ी व ला युक़्ज़ा अलैक, व इन्नहु ला यज़िल्लु मन वालैत, तबारक्त रब्बना व तआलैत
Allāhummahdinī fīman hadayt, wa ‘āfinī fīman ‘āfayt, wa tawallanī fīman tawallayt, wa bārik lī fīmā a‘ṭayt, wa qinī sharra mā qaḍayt, innaka taqḍī wa lā yuqḍā ‘alayk, wa innahū lā yadhillu man wālayt, tabārakta Rabbanā wa ta‘ālayt
ऐ अल्लाह, मुझे हिदायत दे उन लोगों में जिन्हें तूने हिदायत दी, मुझे आफ़ियत दे उन लोगों में जिन्हें तूने आफ़ियत दी, मेरी सरपरस्ती फ़रमा उन लोगों में जिनकी तूने सरपरस्ती फ़रमाई, जो कुछ तूने मुझे दिया है उसमें बरकत दे, और जो तूने फ़ैसला किया है उसकी बुराई से मुझे बचा। बेशक तू ही फ़ैसला करता है और तेरे ख़िलाफ़ कोई फ़ैसला नहीं किया जाता। जिसका तू दोस्त हो, वह कभी ज़लील नहीं होता। ऐ हमारे रब, तू बरकत वाला और बुलंद है।
अबू दाऊद, तिर्मिज़ी और नसाई · सहीह — नबी ﷺ ने अल-हसन को वित्र के क़ुनूत के लिए सिखाई।
उमर का क़ुनूत (हनफ़ी अमल)Qunūt of ‘Umar (Ḥanafī practice)
1×
اللَّهُمَّ إِنَّا نَسْتَعِينُكَ وَنَسْتَغْفِرُكَ وَنُؤْمِنُ بِكَ وَنَتَوَكَّلُ عَلَيْكَ وَنُثْنِي عَلَيْكَ الْخَيْرَ، وَنَشْكُرُكَ وَلَا نَكْفُرُكَ، وَنَخْلَعُ وَنَتْرُكُ مَنْ يَفْجُرُكَ. اللَّهُمَّ إِيَّاكَ نَعْبُدُ، وَلَكَ نُصَلِّي وَنَسْجُدُ، وَإِلَيْكَ نَسْعَىٰ وَنَحْفِدُ، وَنَرْجُو رَحْمَتَكَ وَنَخْشَىٰ عَذَابَكَ، إِنَّ عَذَابَكَ بِالْكَافِرِينَ مُلْحِقٌ
अल्लाहुम्म इन्ना नस्तईनुक व नस्तग़्फ़िरुक व नुअमिनु बिक व नतवक्कलु अलैक व नुस्नी अलैकल-ख़ैर, व नश्कुरुक व ला नक्फ़ुरुक, व नख़्लउ व नत्रुकु मन यफ़्जुरुक। अल्लाहुम्म इय्याक नअबुद, व लक नुसल्ली व नस्जुद, व इलैक नसआ व नह्फ़िद, व नर्जू रह्मतक व नख़्शा अज़ाबक, इन्न अज़ाबक बिल-काफ़िरीन मुल्हिक़
Allāhumma innā nasta‘īnuka wa nastaghfiruka wa nu’minu bika wa natawakkalu ‘alayka wa nuthnī ‘alaykal-khayr, wa nashkuruka wa lā nakfuruk, wa nakhla‘u wa natruku man yafjuruk. Allāhumma iyyāka na‘bud, wa laka nuṣallī wa nasjud, wa ilayka nas‘ā wa naḥfid, wa narjū raḥmataka wa nakhshā ‘adhābak, inna ‘adhābaka bil-kāfirīna mulḥiq
ऐ अल्लाह, हम तुझसे मदद माँगते हैं और तुझसे मग़फ़िरत चाहते हैं; हम तुझ पर ईमान लाते हैं और तुझ पर भरोसा करते हैं; हम तेरी अच्छी तारीफ़ करते हैं और तेरा शुक्र अदा करते हैं, और तेरी नाशुक्री नहीं करते; और जो तेरी नाफ़रमानी करे, हम उससे अलग हो जाते और उसे छोड़ देते हैं। ऐ अल्लाह, हम तेरी ही इबादत करते हैं; तेरे ही लिए नमाज़ पढ़ते और सजदा करते हैं; तेरी ही तरफ़ दौड़ते और लपकते हैं। हम तेरी रहमत की उम्मीद रखते हैं और तेरे अज़ाब से डरते हैं — बेशक तेरा अज़ाब काफ़िरों को पहुँचकर रहने वाला है।
उमर और उबय्य का असर (इब्न अबी शैबा, बैहक़ी) · सहाबा की रिवायत के तौर पर साबित, नबवी हदीस नहीं — हनफ़ी क़ुनूत; बहुत-से लोग ऊपर वाली दुआ भी साथ मिला लेते हैं।

छपी हुई अंग्रेज़ी, हमेशा दिखाई जाती है:

Athar of ‘Umar & Ubayy (Ibn Abī Shaybah, al-Bayhaqī) · sound as a report of the Companions, not a Prophetic ḥadīth — the Ḥanafī qunūt; many add the du‘ā above.
वित्र के बाद
3×
سُبْحَانَ الْمَلِكِ الْقُدُّوسِ — ثُمَّ — رَبِّ الْمَلَائِكَةِ وَالرُّوحِ
सुब्हानल-मलिकिल-क़ुद्दूस — सुम्म — रब्बिल-मलाइकति वर-रूह
Subḥānal-Malikil-Quddūs (3×) — raising and lengthening the voice on the third, then: Rabbil-malā’ikati war-rūḥ
पाक है बादशाह, निहायत मुक़द्दस — फ़रिश्तों और रूह का रब।
नसाई और अबू दाऊद · सहीह (अल्बानी) — वित्र का सलाम फेरने के बाद।

बिंदीदार किनारे वाली पंक्तियाँ अरबी का तलफ़्फ़ुज़ हैं, जो उसकी हरकात से क़ायदे के मुताबिक़ बनाया गया है। ये छपी हुई किताबों से नहीं हैं और इनकी जाँच नहीं हुई है: जहाँ यह अरबी से अलग हो, वहाँ अरबी ही सही है।