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Tafsir As-Saadi - Urdu · Ar-Rahmaan
सूरह 55

Ar-Rahmaan

यह अरबी के अलावा किसी और भाषा में एक तफ़सीर है, जैसी Quranic Universal Library (QUL, Tarteel की) में है, QUL के डेटा की उस खुली प्रति से ली गई जो spa5k/tafsir_api रखता है। QUL के रिकॉर्ड में यह नहीं बताया गया कि इसे किसने लिखा या अनुवाद किया या यह किस छपे संस्करण का अनुसरण करती है, और पाठ के लिए कोई लाइसेंस नहीं बताया गया, इसलिए इसे दिखाने का अधिकार सत्यापित नहीं है। किसी ने इसे छपी किताब से नहीं मिलाया है और किसी आलिम ने इसकी समीक्षा नहीं की है। हर अंश उन आयतों के पास है जिन पर वह टिप्पणी करता है; वे आयतें Tanzil का क़ुरआनी पाठ हैं, जैसा वहाँ है। सबील ने इसमें से कुछ भी न लिखा है, न अनुवाद किया है।

पाठ का स्रोत:Quranic Universal Libraryspa5k/tafsir_apiMIT2026-10-21 को लिया गया

आयतें 31–32

سَنَفْرُغُ لَكُمْ أَيُّهَ ٱلثَّقَلَانِ 31 فَبِأَىِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ 32

عنقریب ہم فارغ ہوں گے تمھارے لیے اے جن و انس! (31) پس (کون) کون سی نعمتوں کو اپنے رب کی، تم دونوں جھٹلاؤ گے؟ (32)

[31، 32] یعنی ہم تمھارے حساب کتاب اور تم نے جو اعمال دنیا میں کیے ہیں، ان کی جزا و سزا دینے کے لیے فارغ ہوں گے۔