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Tafsīr ath-Thaʿālibī · Al-Israa
सूरह 17

Al-Israa

الجواهر الحسان في تفسير القرآن

यह एक शास्त्रीय तफ़सीर का अरबी पाठ है, जैसा Quranic Universal Library (QUL, Tarteel की) में है, QUL के डेटा की उस खुली प्रति से लिया गया जो spa5k/tafsir_api रखता है। QUL यह नहीं बताती कि वह किस छपे संस्करण का अनुसरण करती है और पाठों के लिए कोई लाइसेंस नहीं बताती, इसलिए उन्हें दिखाने का अधिकार सत्यापित नहीं है। किसी ने इसे छपी किताब या पांडुलिपि से नहीं मिलाया है और किसी आलिम ने इसकी समीक्षा नहीं की है। हर अंश उन आयतों के पास है जिन पर वह टिप्पणी करता है; वे आयतें Tanzil का क़ुरआनी पाठ हैं, जैसा वहाँ है। जहाँ पाठ में संपादक की कोई टिप्पणी दोहरे कोष्ठक में है, वहाँ वह जैसी है वैसी दिखाई गई है। अभी कोई अनुवाद नहीं है।

पाठ का स्रोत:Quranic Universal Libraryspa5k/tafsir_apiMIT2026-10-21 को लिया गया

आयतें 21–22

ٱنظُرْ كَيْفَ فَضَّلْنَا بَعْضَهُمْ عَلَىٰ بَعْضٍ ۚ وَلَلْـَٔاخِرَةُ أَكْبَرُ دَرَجَـٰتٍ وَأَكْبَرُ تَفْضِيلًا 21 لَّا تَجْعَلْ مَعَ ٱللَّهِ إِلَـٰهًا ءَاخَرَ فَتَقْعُدَ مَذْمُومًا مَّخْذُولًا 22

وقوله: انْظُرْ كَيْفَ فَضَّلْنا بَعْضَهُمْ عَلى بَعْضٍ الآية تُدلُّ دلالةً ما على أن العطاء في التي قبلها الرْزُق، وباقي الآية معناه أوضَحُ من أن يبيَّن.

وقوله سبحانه: لاَّ تَجْعَلْ مَعَ اللَّهِ إِلهاً آخَرَ فَتَقْعُدَ مَذْمُوماً مَخْذُولًا هذه الآية خطاب للنبيّ ﷺ والمراد لجميعِ الخلقِ، قاله الطبري [[ينظر: «الطبري» (8/ 57) .]] وغيره، ولا مريةَ في ذمِّ مَنْ نحت عوداً أو حجراً، وأشركه في عبادة ربه.

قال ص: فَتَقْعُدَ، أي: فتصير بهذا فسره الفراء وغيرهُ اه.

«والخذلان» في هذا بإِسلام اللَّه لعبده، ألا يتكفَّل له بنصرٍ، والمخذولُ الذي أسلمه ناصروه، والخاذل من الظباء التي تترك ولدها.