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Tafsīr aṭ-Ṭabarī · Al-Ahqaf
सूरह 46

Al-Ahqaf

جامع البيان في تأويل آي القرآن

यह एक शास्त्रीय तफ़सीर का अरबी पाठ है, जैसा Quranic Universal Library (QUL, Tarteel की) में है, QUL के डेटा की उस खुली प्रति से लिया गया जो spa5k/tafsir_api रखता है। QUL यह नहीं बताती कि वह किस छपे संस्करण का अनुसरण करती है और पाठों के लिए कोई लाइसेंस नहीं बताती, इसलिए उन्हें दिखाने का अधिकार सत्यापित नहीं है। किसी ने इसे छपी किताब या पांडुलिपि से नहीं मिलाया है और किसी आलिम ने इसकी समीक्षा नहीं की है। हर अंश उन आयतों के पास है जिन पर वह टिप्पणी करता है; वे आयतें Tanzil का क़ुरआनी पाठ हैं, जैसा वहाँ है। जहाँ पाठ में संपादक की कोई टिप्पणी दोहरे कोष्ठक में है, वहाँ वह जैसी है वैसी दिखाई गई है। अभी कोई अनुवाद नहीं है।

पाठ का स्रोत:Quranic Universal Libraryspa5k/tafsir_apiMIT2026-10-21 को लिया गया

आयतें 22–23

قَالُوٓا۟ أَجِئْتَنَا لِتَأْفِكَنَا عَنْ ءَالِهَتِنَا فَأْتِنَا بِمَا تَعِدُنَآ إِن كُنتَ مِنَ ٱلصَّـٰدِقِينَ 22 قَالَ إِنَّمَا ٱلْعِلْمُ عِندَ ٱللَّهِ وَأُبَلِّغُكُم مَّآ أُرْسِلْتُ بِهِۦ وَلَـٰكِنِّىٓ أَرَىٰكُمْ قَوْمًا تَجْهَلُونَ 23

القول في تأويل قوله تعالى: ﴿قَالُوا أَجِئْتَنَا لِتَأْفِكَنَا عَنْ آلِهَتِنَا فَأْتِنَا بِمَا تَعِدُنَا إِنْ كُنْتَ مِنَ الصَّادِقِينَ (٢٢) ﴾

يقول تعالى ذكره: قالت عاد لهود، إذ قال لهم لا تعبدوا إلا الله: إني أخاف عليكم عذاب يوم عظيم، أجئتنا يا هود لتصرفنا عن عبادة آلهتنا إلى عبادة ما تدعونا إليه، وإلى اتباعك على قولك.

وبنحو الذي قلنا في ذلك قال أهل التأويل.

ذكر من قال ذلك:

⁕ حدثني يونس، قال: أخبرنا ابن وهب، قال: قال ابن زيد، في قوله ﴿أَجِئْتَنَا لِتَأْفِكَنَا عَنْ آلِهَتِنَا﴾ قال: لتزيلنا، وقرأ ﴿إِنْ كَادَ لَيُضِلُّنَا عَنْ آلِهَتِنَا لَوْلا أَنْ صَبَرْنَا عَلَيْهَا﴾ قال: تضلنا وتزيلنا وتأفكنا ﴿فَأْتِنَا بِمَا تَعِدُنَا﴾ من العذاب على عبادتنا ما نعبد من الآلهة ﴿إِنْ كُنْتُ﴾ من أهل الصدق في قوله وعداته.