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Tafsīr aṭ-Ṭabarī · Az-Zumar
सूरह 39

Az-Zumar

جامع البيان في تأويل آي القرآن

यह एक शास्त्रीय तफ़सीर का अरबी पाठ है, जैसा Quranic Universal Library (QUL, Tarteel की) में है, QUL के डेटा की उस खुली प्रति से लिया गया जो spa5k/tafsir_api रखता है। QUL यह नहीं बताती कि वह किस छपे संस्करण का अनुसरण करती है और पाठों के लिए कोई लाइसेंस नहीं बताती, इसलिए उन्हें दिखाने का अधिकार सत्यापित नहीं है। किसी ने इसे छपी किताब या पांडुलिपि से नहीं मिलाया है और किसी आलिम ने इसकी समीक्षा नहीं की है। हर अंश उन आयतों के पास है जिन पर वह टिप्पणी करता है; वे आयतें Tanzil का क़ुरआनी पाठ हैं, जैसा वहाँ है। जहाँ पाठ में संपादक की कोई टिप्पणी दोहरे कोष्ठक में है, वहाँ वह जैसी है वैसी दिखाई गई है। अभी कोई अनुवाद नहीं है।

पाठ का स्रोत:Quranic Universal Libraryspa5k/tafsir_apiMIT2026-10-21 को लिया गया

आयत 72

قِيلَ ٱدْخُلُوٓا۟ أَبْوَٰبَ جَهَنَّمَ خَـٰلِدِينَ فِيهَا ۖ فَبِئْسَ مَثْوَى ٱلْمُتَكَبِّرِينَ 72

القول في تأويل قوله تعالى: ﴿قِيلَ ادْخُلُوا أَبْوَابَ جَهَنَّمَ خَالِدِينَ فِيهَا فَبِئْسَ مَثْوَى الْمُتَكَبِّرِينَ (٧٢) ﴾

يقول تعالى ذكره: فتقول خزنة جهنم للذين كفروا حينئذ: ﴿ادْخُلُوا أَبْوَابَ جَهَنَّمَ﴾ السبعة على قدر منازلكم فيها ﴿خَالِدِينَ فِيهَا﴾ يقول: ماكثين فيها لا يُنقلون عنها إلى غيرها. ﴿فَبِئْسَ مَثْوَى الْمُتَكَبِّرِينَ﴾ يقول: فبئس مسكن المتكبرين على الله في الدنيا، أن يوحدوه ويفردوا له الألوهة، جهنم يوم القيامة.