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Tafsīr aṭ-Ṭabarī · An-Nahl
सूरह 16

An-Nahl

جامع البيان في تأويل آي القرآن

यह एक शास्त्रीय तफ़सीर का अरबी पाठ है, जैसा Quranic Universal Library (QUL, Tarteel की) में है, QUL के डेटा की उस खुली प्रति से लिया गया जो spa5k/tafsir_api रखता है। QUL यह नहीं बताती कि वह किस छपे संस्करण का अनुसरण करती है और पाठों के लिए कोई लाइसेंस नहीं बताती, इसलिए उन्हें दिखाने का अधिकार सत्यापित नहीं है। किसी ने इसे छपी किताब या पांडुलिपि से नहीं मिलाया है और किसी आलिम ने इसकी समीक्षा नहीं की है। हर अंश उन आयतों के पास है जिन पर वह टिप्पणी करता है; वे आयतें Tanzil का क़ुरआनी पाठ हैं, जैसा वहाँ है। जहाँ पाठ में संपादक की कोई टिप्पणी दोहरे कोष्ठक में है, वहाँ वह जैसी है वैसी दिखाई गई है। अभी कोई अनुवाद नहीं है।

पाठ का स्रोत:Quranic Universal Libraryspa5k/tafsir_apiMIT2026-10-21 को लिया गया

आयत 93

وَلَوْ شَآءَ ٱللَّهُ لَجَعَلَكُمْ أُمَّةً وَٰحِدَةً وَلَـٰكِن يُضِلُّ مَن يَشَآءُ وَيَهْدِى مَن يَشَآءُ ۚ وَلَتُسْـَٔلُنَّ عَمَّا كُنتُمْ تَعْمَلُونَ 93

القول في تأويل قوله تعالى: ﴿وَلَوْ شَاءَ اللَّهُ لَجَعَلَكُمْ أُمَّةً وَاحِدَةً وَلَكِنْ يُضِلُّ مَنْ يَشَاءُ وَيَهْدِي مَنْ يَشَاءُ وَلَتُسْأَلُنَّ عَمَّا كُنْتُمْ تَعْمَلُونَ (٩٣) ﴾

يقول تعالى ذكره: ولو شاء ربكم أيها الناس للطف بكم بتوفية من عنده، فصرتم جميعًا جماعة واحدة، وأهل ملة واحدة لا تختلفون ولا تفترقون، ولكنه تعالى ذكره خالف بينكم، فجعلكم أهل ملل شتى، بأن وفَّق هؤلاء للإيمان به، والعمل بطاعته، فكانوا مؤمنين، وخذل هؤلاء فحَرَمهم توفيقه فكانوا كافرين، وليسألنكم الله جميعا يوم القيامة عما كنتم تعملون في الدنيا فيما أمركم ونهاكم، ثم ليجازينكم جزاء المطيع منكم بطاعته، والعاصي له بمعصيته.