Al-Maaida
تيسير الكريم الرحمنयह एक शास्त्रीय तफ़सीर का अरबी पाठ है, जैसा Quranic Universal Library (QUL, Tarteel की) में है, QUL के डेटा की उस खुली प्रति से लिया गया जो spa5k/tafsir_api रखता है। QUL यह नहीं बताती कि वह किस छपे संस्करण का अनुसरण करती है और पाठों के लिए कोई लाइसेंस नहीं बताती, इसलिए उन्हें दिखाने का अधिकार सत्यापित नहीं है। किसी ने इसे छपी किताब या पांडुलिपि से नहीं मिलाया है और किसी आलिम ने इसकी समीक्षा नहीं की है। हर अंश उन आयतों के पास है जिन पर वह टिप्पणी करता है; वे आयतें Tanzil का क़ुरआनी पाठ हैं, जैसा वहाँ है। जहाँ पाठ में संपादक की कोई टिप्पणी दोहरे कोष्ठक में है, वहाँ वह जैसी है वैसी दिखाई गई है। अभी कोई अनुवाद नहीं है।
पाठ का स्रोत:Quranic Universal Libraryspa5k/tafsir_apiMIT2026-10-21 को लिया गया
قُل لَّا يَسْتَوِى ٱلْخَبِيثُ وَٱلطَّيِّبُ وَلَوْ أَعْجَبَكَ كَثْرَةُ ٱلْخَبِيثِ ۚ فَٱتَّقُوا۟ ٱللَّهَ يَـٰٓأُو۟لِى ٱلْأَلْبَـٰبِ لَعَلَّكُمْ تُفْلِحُونَ 100
{100} أي: {قُلۡ} للناس محذِّراً عن الشرِّ ومرغِّباً في الخير: {لا يستوي الخبيثُ والطيبُ}: من كلِّ شيء؛ فلا يستوي الإيمان والكفر، ولا الطاعة والمعصية، ولا أهل الجنة وأهل النار، ولا الأعمال الخبيثة والأعمال الطيبة، ولا المال الحرام بالمال الحلال، {ولو أعۡجَبَكَ كَثۡرَةُ الخبيث}: فإنَّه لا ينفعُ صاحبَه شيئاً، بل يضرُّه في دينه ودنياه، {فاتَّقوا الله يا أولي الألباب لعلَّكم تفلحون}: فأمر أولي الألباب؛ أي: أهل العقول الوافية والآراء الكاملة؛ فإنَّ الله تعالى يوجِّه إليهم الخطاب، وهم الذين يُؤْبَهُ لهم ويُرْجى أن يكونَ فيهم خيرٌ، ثم أخبر أنَّ الفلاح متوقِّف على التَّقوى التي هي موافقة الله في أمره ونهيه؛ فمن اتَّقاه؛ أفلح كل الفلاح، ومَن تَرَكَ تقواه؛ حصل له الخُسران، وفاتته الأرباح.