Muhammad
تيسير الكريم الرحمنयह एक शास्त्रीय तफ़सीर का अरबी पाठ है, जैसा Quranic Universal Library (QUL, Tarteel की) में है, QUL के डेटा की उस खुली प्रति से लिया गया जो spa5k/tafsir_api रखता है। QUL यह नहीं बताती कि वह किस छपे संस्करण का अनुसरण करती है और पाठों के लिए कोई लाइसेंस नहीं बताती, इसलिए उन्हें दिखाने का अधिकार सत्यापित नहीं है। किसी ने इसे छपी किताब या पांडुलिपि से नहीं मिलाया है और किसी आलिम ने इसकी समीक्षा नहीं की है। हर अंश उन आयतों के पास है जिन पर वह टिप्पणी करता है; वे आयतें Tanzil का क़ुरआनी पाठ हैं, जैसा वहाँ है। जहाँ पाठ में संपादक की कोई टिप्पणी दोहरे कोष्ठक में है, वहाँ वह जैसी है वैसी दिखाई गई है। अभी कोई अनुवाद नहीं है।
पाठ का स्रोत:Quranic Universal Libraryspa5k/tafsir_apiMIT2026-10-21 को लिया गया
إِنَّ ٱللَّهَ يُدْخِلُ ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ وَعَمِلُوا۟ ٱلصَّـٰلِحَـٰتِ جَنَّـٰتٍ تَجْرِى مِن تَحْتِهَا ٱلْأَنْهَـٰرُ ۖ وَٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ يَتَمَتَّعُونَ وَيَأْكُلُونَ كَمَا تَأْكُلُ ٱلْأَنْعَـٰمُ وَٱلنَّارُ مَثْوًى لَّهُمْ 12
{12} لما ذكر تعالى أنه وليُّ المؤمنين؛ ذكر ما يفعل بهم في الآخرة من دخول الجناتِ، التي تجري من تحتها الأنهار، التي تسقي تلك البساتين الزاهرة، والأشجار الناضرة المثمرة؛ لكلِّ زوج بَهيج، وكل فاكهة لذيذة. ولمَّا ذَكَرَ أن الكافرين لا مولى لهم؛ ذكر أنَّهم وُكِلوا إلى أنفسهم، فلم يتَّصفوا بصفات المروءة ولا الصفات الإنسانية، بل نزلوا عنها دركاتٍ، وصاروا كالأنعام التي لا عقل لها ولا فضل، بل جلُّ همِّهم ومقصدهم التمتُّع بلذَّات الدُّنيا وشهواتها، فترى حركاتهم الظاهرة والباطنة دائرةً حولها غير متعدِّيةٍ لها إلى ما فيه الخير والسعادة، ولهذا كانت النارُ مثوى لهم؛ أي: منزلاً معدًّا لا يخرجون منها ولا يفتَّر عنهم من عذابها.