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Tafsīr as-Saʿdī
सूरह 37

As-Saaffaat

تيسير الكريم الرحمن

यह एक शास्त्रीय तफ़सीर का अरबी पाठ है, जैसा Quranic Universal Library (QUL, Tarteel की) में है, QUL के डेटा की उस खुली प्रति से लिया गया जो spa5k/tafsir_api रखता है। QUL यह नहीं बताती कि वह किस छपे संस्करण का अनुसरण करती है और पाठों के लिए कोई लाइसेंस नहीं बताती, इसलिए उन्हें दिखाने का अधिकार सत्यापित नहीं है। किसी ने इसे छपी किताब या पांडुलिपि से नहीं मिलाया है और किसी आलिम ने इसकी समीक्षा नहीं की है। हर अंश उन आयतों के पास है जिन पर वह टिप्पणी करता है; वे आयतें Tanzil का क़ुरआनी पाठ हैं, जैसा वहाँ है। जहाँ पाठ में संपादक की कोई टिप्पणी दोहरे कोष्ठक में है, वहाँ वह जैसी है वैसी दिखाई गई है। अभी कोई अनुवाद नहीं है।

पाठ का स्रोत:Quranic Universal Libraryspa5k/tafsir_apiMIT2026-10-21 को लिया गया

अंश

  1. आयतें 1–11وَٱلصَّـٰٓفَّـٰتِ صَفًّا
  2. आयतें 12–21بَلْ عَجِبْتَ وَيَسْخَرُونَ
  3. आयतें 22–26ٱحْشُرُوا۟ ٱلَّذِينَ ظَلَمُوا۟ وَأَزْوَٰجَهُمْ وَمَا كَانُوا۟ يَعْبُدُونَ
  4. आयतें 27–39وَأَقْبَلَ بَعْضُهُمْ عَلَىٰ بَعْضٍ يَتَسَآءَلُونَ
  5. आयतें 40–49إِلَّا عِبَادَ ٱللَّهِ ٱلْمُخْلَصِينَ
  6. आयतें 50–61فَأَقْبَلَ بَعْضُهُمْ عَلَىٰ بَعْضٍ يَتَسَآءَلُونَ
  7. आयतें 62–74أَذَٰلِكَ خَيْرٌ نُّزُلًا أَمْ شَجَرَةُ ٱلزَّقُّومِ
  8. आयतें 75–82وَلَقَدْ نَادَىٰنَا نُوحٌ فَلَنِعْمَ ٱلْمُجِيبُونَ
  9. आयतें 83–113وَإِنَّ مِن شِيعَتِهِۦ لَإِبْرَٰهِيمَ
  10. आयतें 114–122وَلَقَدْ مَنَنَّا عَلَىٰ مُوسَىٰ وَهَـٰرُونَ
  11. आयतें 123–132وَإِنَّ إِلْيَاسَ لَمِنَ ٱلْمُرْسَلِينَ
  12. आयतें 133–138وَإِنَّ لُوطًا لَّمِنَ ٱلْمُرْسَلِينَ
  13. आयतें 139–148وَإِنَّ يُونُسَ لَمِنَ ٱلْمُرْسَلِينَ
  14. आयतें 149–157فَٱسْتَفْتِهِمْ أَلِرَبِّكَ ٱلْبَنَاتُ وَلَهُمُ ٱلْبَنُونَ
  15. आयतें 158–160وَجَعَلُوا۟ بَيْنَهُۥ وَبَيْنَ ٱلْجِنَّةِ نَسَبًا ۚ وَلَقَدْ عَلِمَتِ ٱلْجِنَّةُ إِنَّهُمْ لَمُحْضَرُونَ
  16. आयतें 161–163فَإِنَّكُمْ وَمَا تَعْبُدُونَ
  17. आयतें 164–166وَمَا مِنَّآ إِلَّا لَهُۥ مَقَامٌ مَّعْلُومٌ
  18. आयतें 167–182وَإِن كَانُوا۟ لَيَقُولُونَ