Ar-Room
تيسير الكريم الرحمنयह एक शास्त्रीय तफ़सीर का अरबी पाठ है, जैसा Quranic Universal Library (QUL, Tarteel की) में है, QUL के डेटा की उस खुली प्रति से लिया गया जो spa5k/tafsir_api रखता है। QUL यह नहीं बताती कि वह किस छपे संस्करण का अनुसरण करती है और पाठों के लिए कोई लाइसेंस नहीं बताती, इसलिए उन्हें दिखाने का अधिकार सत्यापित नहीं है। किसी ने इसे छपी किताब या पांडुलिपि से नहीं मिलाया है और किसी आलिम ने इसकी समीक्षा नहीं की है। हर अंश उन आयतों के पास है जिन पर वह टिप्पणी करता है; वे आयतें Tanzil का क़ुरआनी पाठ हैं, जैसा वहाँ है। जहाँ पाठ में संपादक की कोई टिप्पणी दोहरे कोष्ठक में है, वहाँ वह जैसी है वैसी दिखाई गई है। अभी कोई अनुवाद नहीं है।
पाठ का स्रोत:Quranic Universal Libraryspa5k/tafsir_apiMIT2026-10-21 को लिया गया
وَإِذَآ أَذَقْنَا ٱلنَّاسَ رَحْمَةً فَرِحُوا۟ بِهَا ۖ وَإِن تُصِبْهُمْ سَيِّئَةٌۢ بِمَا قَدَّمَتْ أَيْدِيهِمْ إِذَا هُمْ يَقْنَطُونَ 36 أَوَلَمْ يَرَوْا۟ أَنَّ ٱللَّهَ يَبْسُطُ ٱلرِّزْقَ لِمَن يَشَآءُ وَيَقْدِرُ ۚ إِنَّ فِى ذَٰلِكَ لَـَٔايَـٰتٍ لِّقَوْمٍ يُؤْمِنُونَ 37
{36 ـ 37} يخبر تعالى عن طبيعة أكثر الناس في حال الرخاء والشدَّة أنَّهم إذا أذاقهم الله منه رحمةً من صحَّةٍ وغنى ونصرٍ ونحو ذلك؛ فرحوا بذلك فرحَ بَطَرٍ لا فرح شُكْرٍ وتبجُّح بنعمة الله. {وإنۡ تُصِبۡهم سيئةٌ}؛ أي: حالٌ تسوؤهم، وذلك {بما قدَّمت أيديهم}: من المعاصي، {إذا هم يَقۡنَطون}: ييأسون من زوال ذلك الفقر والمرض ونحوه، وهذا جهلٌ منهم وعدم معرفة. {أوَلَمۡ يرَوۡا أنَّ الله يبسطُ الرزقَ لمن يشاء وَيَقۡدِرُ}: فالقنوط بعدما علم أن الخير والشرَّ من الله والرزق سعته وضيقه من تقديره ضائعٌ ليس له محلٌّ؛ فلا تنظر أيُّها العاقل لمجرَّد الأسباب، بل اجعلْ نَظَرَكَ لمسبِّبها، ولهذا قال:{إنَّ في ذلك لآياتٍ لقوم يؤمنون}: فهم الذين يعتبِرونَ ببسطِ الله لِمَنْ يشاءُ وقَبْضِهِ، ويعرفون بذلك حكمة الله ورحْمته وجوده وجذب القلوب لسؤالِهِ في جميع مطالب الرزق.