Al-Maaida
الجامع لأحكام القرآنयह एक शास्त्रीय तफ़सीर का अरबी पाठ है, जैसा Quranic Universal Library (QUL, Tarteel की) में है, QUL के डेटा की उस खुली प्रति से लिया गया जो spa5k/tafsir_api रखता है। QUL यह नहीं बताती कि वह किस छपे संस्करण का अनुसरण करती है और पाठों के लिए कोई लाइसेंस नहीं बताती, इसलिए उन्हें दिखाने का अधिकार सत्यापित नहीं है। किसी ने इसे छपी किताब या पांडुलिपि से नहीं मिलाया है और किसी आलिम ने इसकी समीक्षा नहीं की है। हर अंश उन आयतों के पास है जिन पर वह टिप्पणी करता है; वे आयतें Tanzil का क़ुरआनी पाठ हैं, जैसा वहाँ है। जहाँ पाठ में संपादक की कोई टिप्पणी दोहरे कोष्ठक में है, वहाँ वह जैसी है वैसी दिखाई गई है। अभी कोई अनुवाद नहीं है।
पाठ का स्रोत:Quranic Universal Libraryspa5k/tafsir_apiMIT2026-10-21 को लिया गया
أَلَمْ تَعْلَمْ أَنَّ ٱللَّهَ لَهُۥ مُلْكُ ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضِ يُعَذِّبُ مَن يَشَآءُ وَيَغْفِرُ لِمَن يَشَآءُ ۗ وَٱللَّهُ عَلَىٰ كُلِّ شَىْءٍ قَدِيرٌ 40
قَوْلُهُ تَعَالَى: ﴿أَلَمْ تَعْلَمْ أَنَّ اللَّهَ لَهُ مُلْكُ السَّماواتِ وَالْأَرْضِ﴾ الْآيَةُ. خِطَابٌ لِلنَّبِيِّ ﷺ وَغَيْرِهِ، أَيْ لَا قَرَابَةَ بَيْنَ اللَّهِ تَعَالَى وَبَيْنَ أَحَدٍ تُوجِبُ الْمُحَابَاةَ حتى يقول قائل: نَحْنُ أَبْنَاءُ اللَّهِ وَأَحِبَّاؤُهُ، وَالْحُدُودُ تُقَامُ عَلَى كُلِّ مَنْ يُقَارِفُ مُوجِبَ الْحَدِّ. وَقِيلَ: أَيْ لَهُ أَنْ يَحْكُمَ بِمَا يُرِيدُ، فَلِهَذَا فُرِّقَ بَيْنَ الْمُحَارِبِ وَبَيْنَ السَّارِقِ غَيْرِ الْمُحَارِبِ. وَقَدْ تَقَدَّمَ نَظَائِرُ هَذِهِ الْآيَةِ وَالْكَلَامُ فِيهَا فَلَا مَعْنَى لِإِعَادَتِهَا وَاللَّهُ الْمُوَفِّقُ. هَذَا مَا يَتَعَلَّقُ بِآيَةِ السَّرِقَةِ مِنْ بَعْضِ أَحْكَامِ السَّرِقَةِ. وَاللَّهُ أعلم.