Al-Ahzaab
यह अरबी के अलावा किसी और भाषा में एक तफ़सीर है, जैसी Quranic Universal Library (QUL, Tarteel की) में है, QUL के डेटा की उस खुली प्रति से ली गई जो spa5k/tafsir_api रखता है। QUL के रिकॉर्ड में यह नहीं बताया गया कि इसे किसने लिखा या अनुवाद किया या यह किस छपे संस्करण का अनुसरण करती है, और पाठ के लिए कोई लाइसेंस नहीं बताया गया, इसलिए इसे दिखाने का अधिकार सत्यापित नहीं है। किसी ने इसे छपी किताब से नहीं मिलाया है और किसी आलिम ने इसकी समीक्षा नहीं की है। हर अंश उन आयतों के पास है जिन पर वह टिप्पणी करता है; वे आयतें Tanzil का क़ुरआनी पाठ हैं, जैसा वहाँ है। सबील ने इसमें से कुछ भी न लिखा है, न अनुवाद किया है।
पाठ का स्रोत:Quranic Universal Libraryspa5k/tafsir_apiMIT2026-10-21 को लिया गया
وَإِذْ يَقُولُ ٱلْمُنَـٰفِقُونَ وَٱلَّذِينَ فِى قُلُوبِهِم مَّرَضٌ مَّا وَعَدَنَا ٱللَّهُ وَرَسُولُهُۥٓ إِلَّا غُرُورًا 12
وَإِذْ يَقُولُ الْمُنَافِقُونَ وَالَّذِينَ فِي قُلُوبِهِم مَّرَضٌ مَّا وَعَدَنَا اللَّهُ وَرَسُولُهُ إِلَّا غُرُورًا؛ زيرا منافقان و آنهايي که در دلهايشان بيماري است ، مي گفتند : خدا و پيامبرش جز فريب به ما وعده اي نداده اند.
(12) و این عادت منافق است که به هنگام سختی و بلا، ایمانش استوار و پابرجا نمیماند؛ و با عقل کوتاه بین خود، فقط زمانی را مینگرد که در آن بهسر میبرد، و گمان خود را راست میپندارد.