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Tafsīr al-Baghawī · An-Naml
सूरह 27

An-Naml

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यह एक शास्त्रीय तफ़सीर का अरबी पाठ है, जैसा Quranic Universal Library (QUL, Tarteel की) में है, QUL के डेटा की उस खुली प्रति से लिया गया जो spa5k/tafsir_api रखता है। QUL यह नहीं बताती कि वह किस छपे संस्करण का अनुसरण करती है और पाठों के लिए कोई लाइसेंस नहीं बताती, इसलिए उन्हें दिखाने का अधिकार सत्यापित नहीं है। किसी ने इसे छपी किताब या पांडुलिपि से नहीं मिलाया है और किसी आलिम ने इसकी समीक्षा नहीं की है। हर अंश उन आयतों के पास है जिन पर वह टिप्पणी करता है; वे आयतें Tanzil का क़ुरआनी पाठ हैं, जैसा वहाँ है। जहाँ पाठ में संपादक की कोई टिप्पणी दोहरे कोष्ठक में है, वहाँ वह जैसी है वैसी दिखाई गई है। अभी कोई अनुवाद नहीं है।

पाठ का स्रोत:Quranic Universal Libraryspa5k/tafsir_apiMIT2026-10-21 को लिया गया

आयत 9

يَـٰمُوسَىٰٓ إِنَّهُۥٓ أَنَا ٱللَّهُ ٱلْعَزِيزُ ٱلْحَكِيمُ 9

ثُمَّ تَعَرَّفَ إِلَى مُوسَى بِصِفَاتِهِ، فَقَالَ: ﴿يَا مُوسَى إِنَّهُ أَنَا اللَّهُ الْعَزِيزُ الْحَكِيمُ﴾ وَالْهَاءُ فِي قَوْلِهِ ﴿إِنَّهُ﴾ عِمَادٌ، وَلَيْسَ بِكِنَايَةٍ، وَقِيلَ: هِيَ كِنَايَةٌ عَنِ الْأَمْرِ وَالشَّأْنِ، أَيِ: الْأَمْرُ وَالشَّأْنُ، أَيْ: الْمَعْبُودُ أَنَا [[راجع: التبيان للعكبري: ٢ / ١٠٠٥، زاد المسير: ٧ / ١٥٦.]]