(٥٠) بَابُ فِعْلِ النَّبِيِّ - صلى الله عليه وسلم - بِالثَّوْبِ الجَدِيدِ
पाठ का स्रोत:Shamela 138Muḥammad Abū al-Hudā al-Yaʿqūbī2026-10-25 को लिया गया
85عَنْ أَبِي سَعِيدٍ الخُدْرِيِّ - رضي الله عنه - قَالَ: «كَانَ رَسُولُ اللهِ - صلى الله عليه وسلم - إِذَا اسْتَجَدَّ ثَوْبًا سَمَّاهُ بِاسْمِهِ، عِمَامَةً، أَوْ قَمِيصًا، أَوْ رِدَاءً. ثُمَّ يَقُولُ: اللهم لَكَ الحَمْدُ كَمَا كَسَوْتَنِيهِ، أَسْأَلُكَ خَيْرَهُ وَخَيْرَ مَا صُنِعَ لَهُ، وَأَعُوذُ بِكَ مِنْ شَرِّهِ وَشَرِّ مَا صُنِعَ
لَهُ». حَدِيثٌ صَحِيحٌ أَخْرَجَهُ أَبُو دَاوُدَ وَالتِّرْمِذِيُّ.
यह शैख़ मुहम्मद अबुल-हुदा अल-यअक़ूबी की शमाइल अल-हबीब अल-मुस्तफ़ा (मुअस्ससत अल-इल्म अश-शरीफ़, पहला संस्करण, २०१७) का अरबी पाठ है, जैसा शामेला की प्रति ने दिया है, पृष्ठ-दर-पृष्ठ। यह एक समकालीन लेखक की किताब है, और इसका पहला पृष्ठ सारे अधिकार लेखक के लिए सुरक्षित रखता है: सबील इसे संस्थापक के निर्णय से दिखाता है, और लेखक, प्रकाशक या शामेला से कोई अनुमति न माँगी गई है न दी गई है। किसी ने इस प्रति को छपी किताब से नहीं मिलाया है, और किसी आलिम ने इसकी समीक्षा नहीं की है। हदीसें बिना सनद के, लेखक की अपनी दरजाबंदी और स्रोतों सहित, जैसी किताब में हैं वैसी दी गई हैं; छपे पृष्ठ की पाद-टिप्पणियाँ उस अनुच्छेद के बाद हैं जो उनका क्रमांक रखता है। जो हदीस अगले छपे पृष्ठ तक चलती है वह प्रति में जैसी है वैसी दो अनुच्छेद है। प्रकाशन-विवरण का पृष्ठ और किताब की अपनी विषय-सूची छोड़ दी गई है। कोई अनुवाद नहीं है।