(١٤٤) بَابُ رَحْمَةِ النَّبِيِّ - صلى الله عليه وسلم - بِالصِّغَارِ
पाठ का स्रोत:Shamela 138Muḥammad Abū al-Hudā al-Yaʿqūbī2026-10-25 को लिया गया
عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ - رضي الله عنه - قَالَ: «قَبَّلَ رَسُولُ اللهِ - صلى الله عليه وسلم - الحَسَنَ بْنَ عَلِيٍّ وَعِنْدَهُ الأَقْرَعُ بْنُ حَابِسٍ التَّمِيمِيُّ جَالِسٌ، فَقَالَ الأَقْرَعُ: إِنَّ لِي عَشَرَةً مِنَ الوَلَدِ
176مَا قَبَّلْتُ مِنْهُمْ أَحَدًا، فَنَظَرَ إِلَيْهِ رَسُولُ اللهِ - صلى الله عليه وسلم - ثُمَّ قَالَ: مَنْ لَا يَرْحَمْ
لَا يُرْحَمْ». أَخْرَجَهُ البُخَارِيُّ وَمُسْلِمٌ.
عَنْ جَابِرِ بْنِ عَبْدِ اللهِ - رضي الله عنهما - قَالَ: «صَلَّيْتُ مَعَ النَّبِيِّ - صلى الله عليه وسلم - الظُّهْرَ وَالعَصْرَ، فَلَمَّا سَلَّمَ قَالَ لَنَا: عَلَى أَمَاكِنِكُمْ، وَأُهْدِيَتْ لَهُ جَرَّةٌ مِنْ حَلْوَاءَ، فَجَعَلَ
يُلْعِقُ كُلَّ رَجُلٍ لَعْقَةً، حَتَّى أَتَى عَلَيَّ وَأَنَا غُلامٌ، فَأَلْعَقَنِي لَعْقَةً، ثُمَّ قَالَ لِي: أَزِيدُكَ؟ قُلْتُ: نَعَمْ، وَزَادَنِي لَعْقَةً لِصِغَرِي، فَلَمْ يَزَلْ كَذَلِكَ حَتَّى أَتَى عَلَى
آخِرِ القَوْمِ». أَخْرَجَهُ أَحْمَدُ وَابْنُ مَاجَهْ.
عَنْ أُمِّ المُؤْمِنِينَ عَائِشَةَ - رضي الله عنها -: «أَنَّ رَسُولَ اللهِ - صلى الله عليه وسلم - كَانَ يُؤْتَى بِالصِّبْيَانِ فَيُبَرِّكُ عَلَيْهِمْ وَيُحَنِّكُهُمْ». أَخْرَجَهُ مُسْلِمٌ.
यह शैख़ मुहम्मद अबुल-हुदा अल-यअक़ूबी की शमाइल अल-हबीब अल-मुस्तफ़ा (मुअस्ससत अल-इल्म अश-शरीफ़, पहला संस्करण, २०१७) का अरबी पाठ है, जैसा शामेला की प्रति ने दिया है, पृष्ठ-दर-पृष्ठ। यह एक समकालीन लेखक की किताब है, और इसका पहला पृष्ठ सारे अधिकार लेखक के लिए सुरक्षित रखता है: सबील इसे संस्थापक के निर्णय से दिखाता है, और लेखक, प्रकाशक या शामेला से कोई अनुमति न माँगी गई है न दी गई है। किसी ने इस प्रति को छपी किताब से नहीं मिलाया है, और किसी आलिम ने इसकी समीक्षा नहीं की है। हदीसें बिना सनद के, लेखक की अपनी दरजाबंदी और स्रोतों सहित, जैसी किताब में हैं वैसी दी गई हैं; छपे पृष्ठ की पाद-टिप्पणियाँ उस अनुच्छेद के बाद हैं जो उनका क्रमांक रखता है। जो हदीस अगले छपे पृष्ठ तक चलती है वह प्रति में जैसी है वैसी दो अनुच्छेद है। प्रकाशन-विवरण का पृष्ठ और किताब की अपनी विषय-सूची छोड़ दी गई है। कोई अनुवाद नहीं है।