(١٠٠) بَابُ ضَحِكِ النَّبِيِّ - صلى الله عليه وسلم -
पाठ का स्रोत:Shamela 138Muḥammad Abū al-Hudā al-Yaʿqūbī2026-10-25 को लिया गया
عَنْ عَبْدِ اللهِ بْنِ الحَارِثِ بْنِ جَزْءٍ - رضي الله عنه - أَنَّهُ قَالَ: «مَا كَانَ ضَحِكُ رَسُولِ اللهِ - صلى الله عليه وسلم - إِلَّا تَبَسُّمًا». أَخْرَجَهُ التِّرْمِذِيُّ وَقَالَ: صَحِيحٌ غَرِيبٌ.
عَنْ جَرِيرِ بْنِ عَبْدِ اللهِ البَجَليِّ - رضي الله عنه - قَالَ: «مَا حَجَبَنِي رَسُولُ اللهِ - صلى الله عليه وسلم - مُنْذُ أَسْلَمْتُ، وَلَا رَأَىنِي إِلَّا تَبَسَّمَ فِي وَجْهِي». أَخْرَجَهُ البُخَارِيُّ وَمُسْلِمٌ.
यह शैख़ मुहम्मद अबुल-हुदा अल-यअक़ूबी की शमाइल अल-हबीब अल-मुस्तफ़ा (मुअस्ससत अल-इल्म अश-शरीफ़, पहला संस्करण, २०१७) का अरबी पाठ है, जैसा शामेला की प्रति ने दिया है, पृष्ठ-दर-पृष्ठ। यह एक समकालीन लेखक की किताब है, और इसका पहला पृष्ठ सारे अधिकार लेखक के लिए सुरक्षित रखता है: सबील इसे संस्थापक के निर्णय से दिखाता है, और लेखक, प्रकाशक या शामेला से कोई अनुमति न माँगी गई है न दी गई है। किसी ने इस प्रति को छपी किताब से नहीं मिलाया है, और किसी आलिम ने इसकी समीक्षा नहीं की है। हदीसें बिना सनद के, लेखक की अपनी दरजाबंदी और स्रोतों सहित, जैसी किताब में हैं वैसी दी गई हैं; छपे पृष्ठ की पाद-टिप्पणियाँ उस अनुच्छेद के बाद हैं जो उनका क्रमांक रखता है। जो हदीस अगले छपे पृष्ठ तक चलती है वह प्रति में जैसी है वैसी दो अनुच्छेद है। प्रकाशन-विवरण का पृष्ठ और किताब की अपनी विषय-सूची छोड़ दी गई है। कोई अनुवाद नहीं है।