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अज़कार

जनाज़ा

नमाज़-ए-जनाज़ा में मय्यत के लिए दुआ।

इल्मी जाँच: अभी बाक़ी है

यह टेक्स्ट सबील की प्रिंट लाइब्रेरी से लिया गया है। इसकी इल्मी जाँच अभी जारी है; जब दो उलमा इस पर दस्तख़त कर देंगे, तब हर चीज़ के साथ उसकी जाँच करने वालों के नाम और तारीख़ दर्ज होगी।

ड्राफ़्ट तर्जुमा: मशीन ने अरबी और अंग्रेज़ी से तैयार किया है, और अभी तक किसी आलिम या मातृभाषी एडिटर ने इसे नहीं पढ़ा है। जहाँ कोई पंक्ति साफ़ न हो, वहाँ अंग्रेज़ी दिखाएँ और अरबी पर भरोसा करें।

जो पंक्तियाँ किसी शरई हुक्म से जुड़ी हैं, उनके नीचे छपी हुई अंग्रेज़ी हमेशा दिखाई जाती है। जिस पंक्ति का ड्राफ़्ट जाँच में खरा नहीं उतरा, वह केवल अंग्रेज़ी में दिखाई जाती है।

मय्यत पर (जनाज़ा)
3री तकबीर के बाद
اللَّهُمَّ اغْفِرْ لَهُ وَارْحَمْهُ وَعَافِهِ وَاعْفُ عَنْهُ وَأَكْرِمْ نُزُلَهُ وَوَسِّعْ مُدْخَلَهُ وَاغْسِلْهُ بِالْمَاءِ وَالثَّلْجِ وَالْبَرَدِ وَنَقِّهِ مِنَ الْخَطَايَا كَمَا نَقَّيْتَ الثَّوْبَ الأَبْيَضَ مِنَ الدَّنَسِ وَأَبْدِلْهُ دَارًا خَيْرًا مِنْ دَارِهِ وَأَهْلاً خَيْرًا مِنْ أَهْلِهِ وَزَوْجًا خَيْرًا مِنْ زَوْجِهِ وَأَدْخِلْهُ الْجَنَّةَ وَأَعِذْهُ مِنْ عَذَابِ الْقَبْرِ أَوْ مِنْ عَذَابِ النَّارِ
अल्लाहुम्म-ग़्फ़िर लहु व-र्हम्हु व आफ़िहि व-अफ़ु अन्हु व अक्रिम नुज़ुलहु व वस्सिअ मुद्ख़लहु व-ग़्सिल्हु बिल-माइ वस-सल्जि वल-बरदि व नक़्क़िहि मिनल-ख़ताया कमा नक़्क़ैतस-सौबल-अब्यज़ मिनद-दनसि व अब्दिल्हु दारन ख़ैरन मिन दारिहि व अह्लन ख़ैरन मिन अह्लिहि व ज़ौजन ख़ैरन मिन ज़ौजिहि व अद्ख़िल्हुल-जन्नत व अइज़्हु मिन अज़ाबिल-क़ब्रि औ मिन अज़ाबिन-नार
पूरी रिवायत

Jubair b. Nufair says:I heard it from 'Auf b. Malik that the Prophet (ﷺ) said prayer on the dead body, and I remembered his prayer:" O Allah! forgive him, have mercy upon him, give him peace and absolve him. Receive him with honour and make his grave spacious; wash him with water, snow and hail. Cleanse him from faults as Thou wouldst cleanse a white garment from impurity. Requite him with an abode more excellent than his abode, with a family better than his family, and with a mate better than his mate. Admit him to the Garden, and protect him from the torment of the grave and the torment of the Fire." ('Auf bin Malik) said: I earnestly desired that I were this dead body

अनुवाद खुले डेटासेट का अपना है, जैसा है वैसा दिखाया गया है: अनुवादक का नाम नहीं है, इसके अधिकार सत्यापित नहीं हैं, और किसी ने इसे अरबी से नहीं मिलाया है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

पूरा पाठ दिखाया गया है, सहीह मुस्लिम · नंबर 2232 से। छपे संस्करण में यह छोटा है। नीचे की पंक्तियाँ छपे संस्करण की हैं, जो छोटे पाठ के लिए लिखी गई थीं।

Allāhummaghfir lahu warḥamh, wa ‘āfihi wa‘fu ‘anh, wa akrim nuzulah, wa wassi‘ mudkhalah, waghsilhu bil-mā’i wath-thalji wal-barad
ऐ अल्लाह, इसे बख़्श दे और इस पर रहम फ़रमा, इसे आफ़ियत दे और इसे माफ़ कर दे, इसकी मेहमानी इज़्ज़त के साथ फ़रमा, इसके दाख़िल होने की जगह को कुशादा कर दे, और इसे पानी, बर्फ़ और ओलों से धो दे।
मुस्लिम · सहीह — पहली तकबीर के बाद अल-फ़ातिहा, दूसरी के बाद दुरूद, तीसरी के बाद यह, चौथी के बाद सलाम।

बिंदीदार किनारे वाली पंक्तियाँ अरबी का तलफ़्फ़ुज़ हैं, जो उसकी हरकात से क़ायदे के मुताबिक़ बनाया गया है। ये छपी हुई किताबों से नहीं हैं और इनकी जाँच नहीं हुई है: जहाँ यह अरबी से अलग हो, वहाँ अरबी ही सही है।